संगठन


संगठनात्म क ढांचा

वर्तमान में अनुसंधान और विकास के संपूर्ण पहलुओं का निष्पा6दन संस्थान के विभिन्नछ अनुभागों यथा मृदा विज्ञान एवं रसायन, पादप प्रजनन एवं आनुवंशिकी, उत्त‍क संवर्धन, तसर भोज्यभ पौधा से संबंधित सस्यमविज्ञान एवं पादप रोग विज्ञान द्वारा किया जा रहा है। उसी प्रकार तसर रेशमकीट सुधार एवं उत्पाृदकता के लिए रेशमकीट प्रजनन एवं आनुवंशिकी, रेशमकीट शरीर क्रिया विज्ञान एवं जैव रसायन, रेशमकीट रोग विज्ञान एवं सूक्ष्मी जैविकी, रेशमकीट बीज प्रौद्योगिकी, रेशमकीट पालन प्रौद्योगिकी और कीट विज्ञान जैसी विभिन्नए प्रयोगशालाएं हैं। कोसोत्तेर (धागाकरण एवं कताई) गतिविधियों पर कोसोत्तवर प्रौद्योगिकी प्रभाग द्वारा अध्यीयन किए जाते हैं। संस्था‍न कुल 37.48 हे. क्षेत्रफल में फैला हुआ है जिसका 25.37 हे. क्षेत्रफल भोज्य पादप पौधारोपण (टर्मिनेलिया अर्जुना : 13.53 हे., टी. टोमेन्टोासा : 8.75 हे., प्रक्षेत्र जीन बैंक : 0.74 हे., पौधशाला: 0.35 हे., प्राकृतिक साल वन: 2.0 हे.) के अंतर्गत है। प्रयोगशालाएं उन्न्त एवं आणविक प्रकृति के अनुसंधान करने हेतु सुसज्जित हैं। रेशमकीट प्रजनन अध्य0यन एवं प्रजाति अनुरक्षण कार्यक्रम हेतु बीजागार प्रचालन की सुविधा हेतु परिसर में दो तसर बीजागार भवन उपलब्धं हैं। नियंत्रण अवस्था्ओं के अंतर्गत रेशमकीट रोगों पर अनुसंधान करने हेतु परिसर में उपकरणों से सुसज्जित एक अलग कीटपालन गृह उपलब्धओ है। इसके अतिरिक्तो, झारखण्डस एवं छत्तीससगढ़ में अवस्थित तीन पी4 रेशमकीट प्रजनन केन्द्रह प्रजनक भण्डाुर का रख-रखाव करते हैं। परियोजना प्रबोधन एवं मूल्यांकन (पीएमईसी) अनुभाग संस्थान और इसकी संबद्ध इकाइयों की संपूर्ण अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों की निगरानी और समन्वय करता है। संस्थान का प्रसार एवं तकनीकी हस्तांधतरण (ईटीटी) अनुभाग उपरोक्त प्रयोगशालाओं/अनुभागों से निकाली गई सिद्ध प्रौद्योगिकियों/निष्कर्षों तथा उसके लाभों को किसानों और अन्य हितधारकों तक रूपांतरित करने हेतु व्यवस्थित हस्तांतरण में संबद्ध इकाइयों की गतिविधियों का समन्वय करता है। संस्थान का विस्तार नेटवर्क अर्थात विभिन्न तसर उत्पासदक राज्यों में स्थित क्षेत्रीय रेशम उत्पा्दन अनुसंधान केन्द्र् (उष्णद कटिबंधीय-5 और शीतोष्णव-1) एवं अनुसंधान विस्ताकर केन्द्रत (उष्णन कटिबंधीय-2 और शीतोष्णक-1) तकनीकी के हस्तांतरण में सहायता प्रदान करता है। संस्थान का प्रशिक्षण प्रभाग विभिन्न लक्षित समूहों को प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए अपेक्षित आधुनिक अवसंरचना से सुसज्जित है। यह विभिन्न लक्षित समूहों - निर्दिष्टक राज्यों के रेशम विभागों के अधिकारियों/कर्मचारियों, हितधारकों और उद्यमियों के लिए संरचित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से तसर क्षेत्र में कुशल और प्रशिक्षित मानव संसाधन पैदा करने की जिम्मेदारी वहन करता है। प्रशिक्षण प्रभाग आवश्यकता-आधारित औपचारिक और अनौपचारिक, विशिष्ट परिस्थितियों और जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदान करता है। नवीनतम विकासों में क्षेत्र के प्रक्षेत्र अधिकारियों के ज्ञान को अद्यतन करने के लिए इन-हाउस प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। पाठ्यक्रम में भोज्यं पौधों की खेती एवं प्रबंधन, रेशमकीट बीज उत्पादन और कीटपालन, पीड़क एवं रोग प्रबंधन तथा यार्न के प्रसंस्करण तक तसर संवर्धन के सभी पहलू समाहित हैं। संस्थान विभिन्न संस्थानों/विश्वविद्यालयों के स्नापतक/स्नारत्कोोत्तयर छात्रों को भी तसर संवर्धन के विभिन्न पहलुओं में परियोजना कार्यों/शोध प्रबंधों को पूरा करने के लिए सुविधाएं प्रदान करता है, जिसमें आणविक जीवविज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी शामिल हैं। संस्थान में सभी सुविधाओं से युक्तं एक सुसज्जित पुस्तकालय है और पाठकों को संदर्भ, अंतर-पुस्तकालय ऋण, फोटोकॉपी, इत्याेदि जैसी सुविधाएं प्रदान करता है। इसमें विभिन्न पहलुओं पर 3640 संदर्भ पुस्तकों/पाठ्य पुस्तकों वैज्ञानिक जर्नलों के सजिल्दए अंकों तथा अनेक वैज्ञानिक पत्रिकाओं/न्यूसज लेटर का अच्छा संग्रह है।